Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में उलà¥à¤Ÿà¥€ होने के कारण, लकà¥à¤·à¤£ और उपचार
जब पेट के पदारà¥à¤¥ यानि खाना-पानी आदि पूरे जोश के साथ मà¥à¤à¤¹ और नाक के जरिये निकलता है, तो उस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को उलà¥à¤Ÿà¥€ कहा जाता है। उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤ होने के बहà¥à¤¤ से कारण होते हैं, जैसे कि अधिक या दूषित खाना खाना, बीमारी, विषाणà¥à¤œà¤¨à¤¿à¤¤ संकà¥à¤°à¤®à¤£, पेट का संकà¥à¤°à¤®à¤£, बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में चोट, इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¥¤ उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤ होने के à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ को मतली के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है, लेकिन यह उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤ आने से पहले का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होता है, कारण नहीं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में उलà¥à¤Ÿà¥€ होना कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
उलà¥à¤Ÿà¥€ आना कोई गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं है, बलà¥à¤•ि दिनचरà¥à¤¯à¤¾, खानपान में बदलाव के कारण à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में उलà¥à¤Ÿà¥€ के इन पाà¤à¤š पà¥à¤°à¤•ारों का वरà¥à¤£à¤¨ मिलता है-
-वातज
-पितà¥à¤¤à¤œ
-कफज
-तà¥à¤°à¤¿à¤¦à¥‹à¤·à¤œ
-आगंतà¥à¤œ
वातज- पेट में गैस से होने वाली उलà¥à¤Ÿà¥€ वातज की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आती है। इस तरह की उलà¥à¤Ÿà¥€ कम मातà¥à¤°à¤¾ में कड़वी, à¤à¤¾à¤—वाली और पानी जैसी होती है। लेकिन कई बार इसके साथ सिर का दरà¥à¤¦, सीने में जलन, नाà¤à¤¿ में जलन, खांसी और आवाज का खराब होना आदि समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ होती हैं।
पितà¥à¤¤à¤œ- पितà¥à¤¤ की गरà¥à¤®à¥€ के कारण होने वाली उलà¥à¤Ÿà¥€ पितà¥à¤¤à¤œ की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पीले, हरे रंग की उलà¥à¤Ÿà¥€ आती है और मà¥à¤à¤¹ का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बेहद बà¥à¤°à¤¾ हो जाता है। इसमें à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली व गले में जलन हो सकती है। सिर घूमना, बेहोशी à¤à¥€ इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में शामिल है।
कफज- कफ के कारण होने वाली उलà¥à¤Ÿà¥€ इस शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आती है। इसमें उलà¥à¤Ÿà¥€ का रंग सफेद और पà¥à¤°à¤•ार गाढ़ा होता है। इसका सà¥à¤µà¤¾à¤¦ मीठा होता है। मà¥à¤à¤¹ में पानी à¤à¤°à¤¨à¤¾, शरीर का à¤à¤¾à¤°à¥€ होना, बार-बार नींद आना, जैसे लकà¥à¤·à¤£ इस पà¥à¤°à¤•ार की उलà¥à¤Ÿà¥€ में होना सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• होता है।
तà¥à¤°à¤¿à¤¦à¥‹à¤·à¤œ- तà¥à¤°à¤¿à¤¦à¥‹à¤·à¤œ उलà¥à¤Ÿà¥€ वह होती है जो वात, पितà¥à¤¤ और कफ, तीनों कारणों के चलते होती है। यह गाढ़ी, नीले रंग की या खून की हो सकती है। सà¥à¤µà¤¾à¤¦ में नमकीन या खटà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है। इसके अलावा पेट में तेज दरà¥à¤¦, à¤à¥‚ख में कमी, जलन, सांस लेने में परेशानी और बेहोशी à¤à¥€ इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में शामिल होता है।
आगंतà¥à¤œ- इस तरह की उलà¥à¤Ÿà¥€ बदबू, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾, अरूचिकर à¤à¥‹à¤œà¤¨, पेट में कीड़े या किसी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ विशेष पर जाने से हो सकती है। इस तरह की उलà¥à¤Ÿà¥€ को आगंतà¥à¤œ छरà¥à¤¦à¤¿ à¤à¥€ कहते हैं।
उलà¥à¤Ÿà¥€ होने के पà¥à¤°à¤•ार-
दूध का फटना- यह तब होता है, जब आपका बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करता है। उसके पेट में दूध की मातà¥à¤°à¤¾ की अधिकता के कारण à¤à¤¸à¤¾ होता है।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤µà¤¾à¤¹- यह उलà¥à¤Ÿà¥€ आमतौर पर शिशà¥à¤“ं में ही होती है। जब बचà¥à¤šà¥‡ के ऊपर का बालà¥à¤µ गलती से खà¥à¤²à¤¾ रह जाता है तो à¤à¥‹à¤œà¤¨, à¤à¥‹à¤œà¤¨ पाइप से उलà¥à¤Ÿà¤¾ आ सकता है, यह कोई बीमारी नहीं है। यह समय के साथ ठीक हो जाता है।
उलà¥à¤Ÿà¥€ का पà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ªà¥à¤¯- à¤à¤¸à¤¾ तब होता है, जब आपका बचà¥à¤šà¤¾ अपने पेट की सामगà¥à¤°à¥€ को शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ तरीके से बाहर निकालता है।
और पढ़े-बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ (शिशà¥à¤“ं) में कबà¥à¥› के लकà¥à¤·à¤£, कारण, घरेलू उपचार और परहेज
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में उलà¥à¤Ÿà¥€ होने का कारण
बचà¥à¤šà¥‡ दूध पीने के बाद उलà¥à¤Ÿà¥€ कर देते हैं तो इसमें परेशानी की कोई बात नहीं है और न ही इसे पेट खराब होने वाला कोई संकेत समà¤à¥‡à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि अगर आपका बचà¥à¤šà¤¾ उलà¥à¤Ÿà¥€ कर देता है तो वह सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है और यह करना उसे पसंद है।
मां अपने बचà¥à¤šà¥‡ को गोद में लेकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° समय दूध पिलाती है। फिर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गोद में ही लिटाती है। अगर इस दौरान बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¥€ हो जाती है तो मतलब है कि बचà¥à¤šà¥‡ की छाती हलà¥à¤•ी हो गई है। इसका मतलब है कि बचà¥à¤šà¥‡ का पाचन तंतà¥à¤° अचà¥à¤›à¤¾ है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को नींद à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ आती है। दूध पीने के दौरान दूध बचà¥à¤šà¥‡ की मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° टà¥à¤¯à¥‚ब से होते हà¥à¤ उसके पेट में जाता है। इस मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° टà¥à¤¯à¥‚ब को इसोफेगस कहते हैं। इसोफेगस और पेट को जोड़ने के लिठà¤à¤• मसलà¥à¤¸ रिंग होती है जो बचà¥à¤šà¥‡ के दूध पीने पर खà¥à¤² जाती है। दूध पीना बंद करने के बाद ये रिंग बंद हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में रिंग अगर सही है और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ टाइट नहीं है तो सारा दूध इसोफेगस में वापस चला जाता है। दूध के रिंग में वापस जाने के कारण ही उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है।
आहार के साथ समायोजन- शिशॠका आहार à¤à¥€ उसकी उलà¥à¤Ÿà¥€ करने का कारण हो सकता है। जनà¥à¤® के बाद शिशॠको अपने आहार के साथ समायोजन बनाने मे समय लगता है। इस दौरान बचà¥à¤šà¥‡ का उलà¥à¤Ÿà¥€ करना सामानà¥à¤¯ है और आपको इसके लिठचिंता करने की जरूरत नहीं। इस दौरान शिशॠउलà¥à¤Ÿà¥€ करने के साथ रोता à¤à¥€ है। हालांकि यह केवल कà¥à¤› महीनों में सामानà¥à¤¯ हो जाता है।
कार सिकनेस- अगर आप अपने नवजात शिशॠके साथ यातà¥à¤°à¤¾ कर रही है तो गाड़ी और सड़कों पर यातà¥à¤°à¤¾ करने के कारण à¤à¥€ शिशॠउलà¥à¤Ÿà¥€ कर सकता है और यह सामानà¥à¤¯ है।
लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक रोना-अधिक देर तक रोने से बचà¥à¤šà¥‡ पर तनाव पड़ता है और यह उलà¥à¤Ÿà¥€ का कारण बन सकता है। अगर शिशॠलंबे समय तक रोता है या खांस रहा है तो इस कारण à¤à¥€ वह उलà¥à¤Ÿà¥€ कर सकता है और इस बारे में आपको अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। अधिक देर तक रोने से बचà¥à¤šà¥‡ पर तनाव पड़ता है और यह उलà¥à¤Ÿà¥€ का कारण बन सकता है।
फूड à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€-जब शिशॠसामानà¥à¤¯ आहार लेना शà¥à¤°à¥ करता है तो à¤à¤¸à¤¾ अकà¥à¤¸à¤° होता है कि उसे फूड à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का सामना करना पड़े। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहोता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी विशेष खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आपको डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिà¤à¥¤
उलà¥à¤Ÿà¥€ में खून आना-à¤à¤• या दो बार शिशॠकी उलà¥à¤Ÿà¥€ में खून की à¤à¤• या दो बूंदे दिखना चिंता का विषय नहीं होगा। हालांकि अगर à¤à¤¸à¤¾ कई बार हो और खून की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो तो आपको डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिà¤à¥¤
उलà¥à¤Ÿà¥€ के साथ बà¥à¤–ार या डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होना-अगर आपके शिशॠको उलà¥à¤Ÿà¥€ के साथ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ जैसे बà¥à¤–ार, मà¥à¤‚ह का सूखना, रोते वकà¥à¤¤ आंसू न आना या शिशॠका सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ न करना आदि दिखें तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें।
और पढ़े- शिशà¥à¤“ं à¤à¤µà¤‚ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£, कारण, घरेलू उपचार और परहेज
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने के उपाय
बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पीने के बाद उलà¥à¤Ÿà¥€ होना मतलब बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है। उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने की कोशिश कà¤à¥€ न करें। उलà¥à¤Ÿà¥€ को रोकने पर बचà¥à¤šà¥‡ को छाती में घà¥à¤Ÿà¤¨ हो सकती है जो उसके लिठखतरनाक हो सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ की उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ रोकना आपके बस में नहीं है और रोकने की कोशिश करनी à¤à¥€ नहीं चाहिà¤à¥¤ लेकिन अगर बचà¥à¤šà¤¾ अधिक उलà¥à¤Ÿà¥€ करता है तो इन तरीकों के जरिये इसे कम जरूर कर सकते हैं।
-बचà¥à¤šà¥‡ को केवल सही समय पर और उचित मातà¥à¤°à¤¾ में ही à¤à¥‹à¤œà¤¨ या दूध दें। जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ या कम न दें।
-बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤• साथ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फीड कराने या à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराने के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर उसे थोड़ा-थोड़ा ही खाना दें।
-यदि शिशॠसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद दूध उलटता है, तो उसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार-बार डकार दिलाà¤à¤‚।
-यदि शिशॠफॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीता है, तो सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि बोतल में निपà¥à¤ªà¤² का छेद जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बड़ा न हो।
-दूध पीने के ठीक बाद शिशॠको अपने घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ पर न उछालें, उछलने वाली कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ पर न बिठाà¤à¤‚ या बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ न होने दें। à¤à¥‹à¤œà¤¨ को पेट में समायोजित होने के लिठसमय चाहिठहोता है। खाना खाने के बाद आधे घंटे तक शिशॠको सीधा रखने से मदद मिल सकती है।
-समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ या à¤à¥‹à¤œà¤¨ करवाने से कई बार उलà¥à¤Ÿà¥€ कम करने में मदद मिल सकती है। आप à¤à¥€ यह आजमाकर देख सकती हैं।
-बचà¥à¤šà¥‡ को खाना खिलाने के 30 मिनट बाद तक सीधे बिठा कर रखें।
-अगर आप बचà¥à¤šà¥‡ को ठोस आहार दे रही हैं तो धीरे-धीरे खिलाà¤à¤‚। छह माह के बाद अकà¥à¤¸à¤° जब आप बचà¥à¤šà¥‡ को ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥ करते हैं तो शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दिनों में बचà¥à¤šà¥‡ उलà¥à¤Ÿà¥€ कर सकते हैं।
-à¤à¤• साथ पूरा खाना न खिलाà¤à¤‚। थोड़ा-थोड़ा करके खिलाà¤à¤‚।
-चलती कार में सफर के दौरान होने वाली मिचली को कम करने के लिà¤, बीच-बीच में कई बार रà¥à¤•ें, ताकि शिशॠको ताजा हवा मिल सके और उसके पेट को आराम मिले। यदि शिशॠठोस आहार खाता है तो उसे यातà¥à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥ करने से पहले थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में सेहतमंद सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ दें। पेट थोड़ा à¤à¤°à¤¾ होने से मदद मिलेगी। साथ ही उसके शरीर में जल की मातà¥à¤°à¤¾ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रखने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥ दें।
-बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हमेशा आरामदायक कपड़े ही पहनाठऔर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखे कि डायपर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ टाइट न हो। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ टाइट कपड़ों से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गरà¥à¤®à¥€ हो सकती है जिसकी वजह से वह उलà¥à¤Ÿà¥€ कर सकता है।
-खाना खिलाने के बाद शिशॠको डकार अवशà¥à¤¯ दिलवाà¤à¤‚। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीनों में यह बेहद जरूरी होता है।
-शिशॠको खाना खिलाने के बाद कम से कम आधे घंटे तक सीधा रखें और उसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हंसाये à¤à¥€ नहीं।
-खाना खाने के तà¥à¤°à¤‚त बाद और सोते समय à¤à¥€ शिशॠको पेट के बल न लिटाये।
-अपने शिशॠको खाना खाने के बाद जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हिलाठनहीं।
-शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराते समय उसकी पोजिशन को सही रखें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने के घरेलू उपाय
आम तौर पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को उलà¥à¤Ÿà¥€ से निजात पाने के लिठलोग सबसे पहले घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–़ों को ही आजमाते हैं। यहां हम पतंजली के विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पारित कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ घरेलू उपायों के बारे में बात करेंगे जिनके पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का उलà¥à¤Ÿà¥€ होना रोका जा सकता है।
अनार का रस बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
जब बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हों तो उसे नींबू का रस और अनार का रस मिलाकर पिलाà¤à¤‚। इससे उलà¥à¤Ÿà¥€ बंद हो जाती है। चाहे तो इसमें शहद à¤à¥€ मिला सकती हैं।
और पढ़े- नींबू के अनजाने फायदे
नींबू बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
जब बचà¥à¤šà¥‡ को गरà¥à¤®à¥€ लग जाने की वजह से उलà¥à¤Ÿà¥€ हो रही हो तो à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ को थोड़े से पानी में नमक और नींबू का रस मिलाकर पिलाà¤à¤‚। यह घोल बचà¥à¤šà¥‡ को दिन में दो से तीन बार पिलाà¤à¤‚ उससे अधिक न दें।
पà¥à¤¯à¤¾à¤œ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
यदि बचà¥à¤šà¥‡ को कà¥à¤› पच नहीं रहा हो तो आप पà¥à¤¯à¤¾à¤œ को कदà¥à¤¦à¥‚कस करके उसका रस बचà¥à¤šà¥‡ को दिन में दो से तीन बार दे। इससे उलà¥à¤Ÿà¥€ बंद हो जाती है।
अदरक बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
छोटे बचà¥à¤šà¥‡ अदरक खाना पसंद नहीं करते हैं। इसलिठआप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अदरक वाली चाय दे सकते हैं। इससे उनका जी मिचलाना बंद हो जाà¤à¤—ा और वे खाने-पीने à¤à¥€ लगेंगे। इससे पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ बेहतर होती है।
चावल का पानी बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
उलà¥à¤Ÿà¥€ यदि गैस के कारण हो रही है तो उसे उबले हà¥à¤ चावल का पानी पिलाà¤à¤‚। दिन में तीन बार दो से तीन चमà¥à¤®à¤š चावल का मांड पिलाà¤à¤‚। इससे बचà¥à¤šà¥‡ का उलà¥à¤Ÿà¥€ आना बंद होने लगता है।
इलायची बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
इलायची के बीजों को तवे पर à¤à¥‚नकर चूरà¥à¤£ बना लें। इसके बाद इस चूरà¥à¤£ को लगà¤à¤— 2-2 गà¥à¤°à¤¾à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ में शहद के साथ मिलाकर बचà¥à¤šà¥‡ को दिन में 3 बार चटाà¤à¤‚। बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ आना धीरे-धीरे बंद होने लगता है।
और पà¥à¥‡à¤‚ – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के कबà¥à¤œ के लिठघरेलू उपचार
धनिया का मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ काढ़ा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
धनिया, सौंफ, जीरा, इलायची तथा पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾ सà¤à¥€ को समान मातà¥à¤°à¤¾ में लेकर पानी में à¤à¤¿à¤—ो दें। इसके बाद जब ये सारी चीजें फूल जाà¤à¤‚ तो इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पानी में ही मसल लें और इस पानी को छान लें। इसके बाद इस पानी को बचà¥à¤šà¥‡ को दिन में तीन से चार बार पिलाà¤à¤‚। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¥€ होना बंद हो जाà¤à¤—ा।
तà¥à¤²à¤¸à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में फायदेमंद
तà¥à¤²à¤¸à¥€ के ताजे पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ं का à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर पिलाने से राहत मिलती है।
और पढ़े- तà¥à¤²à¤¸à¥€ खाने के फायदे
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाना चाहिà¤?
यदि आपको अपने बचà¥à¤šà¥‡ में निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कोई लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करने में देर नहीं करनी चाहिà¤-
-मà¥à¤‚ह सूखने लगना, आंसूओं की कमी, धंसे हà¥à¤ कलांतराल, सà¥à¤¸à¥à¤¤ या ढीला-ढीला-सा लगना और सामानà¥à¤¯ की अपेकà¥à¤·à¤¾ कम गीली नैपी (à¤à¤• दिन में छह नैपियों से कम) होने पर निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण (डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨) का संकेत।
-बà¥à¤–ार।
-दसà¥à¤¤ (डायरिया)।
-सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने या फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीने से मना करना।
-12 घंटे से अधिक समय तक उलà¥à¤Ÿà¥€ करना, या अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• बल के साथ उलà¥à¤Ÿà¥€ करना।
-à¤à¤¸à¤¾ रैश (चकतà¥à¤¤à¤¾) जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ को दबाने पर à¤à¥€ हलà¥à¤•ा न पड़े।
-उनींदापन और बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिड़चिड़ापन।
-सांस की कमी।
-पेट में फà¥à¤²à¤¾à¤µà¤Ÿ या सूजन।
-मल में खून आना।
-उलà¥à¤Ÿà¥€ में खून या पितà¥à¤¤ (गहरा पीला या हरा पदारà¥à¤¥)।
-दूध पीने के आधे घंटे के अनà¥à¤¦à¤° नवजात शिशॠदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लगातार बहà¥à¤¤ बल के साथ उलà¥à¤Ÿà¥€à¥¤
-वजन घटना या उचित वजन न बढ़ना।
| --------------------------- | --------------------------- |